पहले नवरात्री की नव दुर्गा

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नवरात्री की नव दुर्गा

नवरात्र महात्यमय नवरात्र का सीधा अर्थ है वो रात्रियां जिनमे मौसम में अंतर दिखाई देता है हमारे देश में 6 ऋतुएँ होती है , परंतु दो बार ऋतुओ का प्रभाव विशेष रूप से दिखाई देता है वो है सर्दी और गर्मी शीत का प्रभाव हमे आश्विन यानी अस्सू माह से ही प्रतीत होने लगता है ज्योहि मौसम में बदलाव आता है कुछ न कुछ बीमारिया अपना प्रकोप शुरू कर देती है शरीर में खून ठंडा होना आरम्भ हो जाता है और जैसे ही गर्मी शुरू होने लगती है शरीर का खून उबलने लगता है चैत्र मास में गर्मी शुरू होने लगती है कई व्याधिया अपना रूप दिखाती है जिसे हम ऋतु परिवर्तन का संधि काल भी कहते है और वो ही राते यदि शक्ति को स्थिर रखने के लिए शक्ति उपासना में दिखाई जाये तो वो समय भक्ति आदि करने से बीत जाता, हमे कष्टनहीं होता शक्ति ही माँ दुर्गा है जिनके तीनो रूप की हम उपासना करते है वो है महाकाली, महालक्मी, महासरस्वती काली हमे काल कटंक से बचती है महलक्ष्मी धन की वर्षा करती है महासरस्वती ज्ञान की दाता है

  प्रथम नवदुर्गा: माता शैलपुत्री

प्रथम नवदुर्गा: माता शैलपुत्री

मां दुर्गा शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक सनातन काल से मनाया जाता रहा है. आदि-शक्ति के हर रूप की नवरात्र के नौ दिनों में पूजा की जाती है. अत: इसे नवरात्र के नाम भी जाना जाता है. सभी देवता, राक्षस, मनुष्य इनकी कृपा-दृष्टि के लिए लालायित रहते हैं. यह हिन्दू समाज का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जिसका धार्मिक, आध्यात्मिक, नैतिक व सांसारिक इन चारों ही दृष्टिकोण से काफी महत्व है। दुर्गा पूजा का त्यौहार वर्ष में दो बार आता है, एक चैत्र मास में और दूसरा आश्विन मास में. चैत्र माह में देवी दुर्गा की पूजा बड़े ही धूम धाम से की जाती है लेकिन आश्विन मास का विशेष महत्व है. दुर्गा सप्तशती में भी आश्विन माह के शारदीय नवरात्रों की महिमा का विशेष बखान किया गया है. दोनों मासों में दुर्गा पूजा का विधान एक जैसा ही है, दोनों ही प्रतिपदा से दशमी तिथि तक मनायी जाती है।

Mahant-Om-Nath-Sharma-Jee

 

 

 

 

                                                                                                     

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