सुरक्षित नहीं सैनिटरी नैपकिन

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जैसे खतरनाक रसायन भी होते है जो प्रजनन तथा विकास संबंधी समस्याओ का कारण बनते है हार्मोन्स को प्रभावित करने से लेकर कैंसर भी हो सकता है गोपी ने कहा की भारत में 36 करोड़ महिलाओ में से केवल 4 करोड़ ही ब्रांडेड नैपकिन इस्तेमाल करती है अन्य अभी भी कपड़े मिटटी या लकड़ी के बुरादे से काम चला रही है रेडसाइकल के संस्थापक अर्जुन उन्नीकृष्ण ने कहा महिलाओ ने सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करना शुरू किया कियोकि वे उन्हें पारम्परिक कपड़े के पैड्स को इस्तेमाल करने में होने वाली कठिनाई भी इसका एक अन्य कारण था इस आराम की कीमत उन्हें अपने स्वास्थ्य को हानि से चुकानी पड़ रही है

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