संत शिरोमणि गुरु रविदास जी

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संत रविदास जी का जन्म उतर प्रदेश के वाराणसी शहर में हुआ उनके पिता बाता संतोक दासजी व माता कलसादेवी थी परिवार जाति से चमार था और पिता का व्यवसाय चमड़े से जूते बनाना था बनारस जहाँ ऊँच-नीच छुआछात का बोलबाला था उस नगरी में एक निम्न जाति के बालक को शिक्षा कहाँ से प्राप्त होती रविदास जी का संपर्क कबीरदास से हुआ और फिर उनके माध्यम से रामानंद जी से आर्शीवाद स्वरूप शिक्षा प्राप्त की रामानंद जी उनके ज्ञन व ध्यान से समझ चुके थे की वे ईश्वर की संतान है बचपन से ही उनका चित ईश्वर भक्ति में लगता और दिन रात साधु संगत प्रभु -सिमरन में बीता जाता उन्होंने घूम -घूमकर रचनाओं के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों व छुआछात को दूर करने के लिए अग्रसर रहे अल्प समय में ही उनकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक हो गई रविदास जी की भक्ति व प्रभु -प्रेम से प्रभावित होकर न केवल राजा वीरसिंह वाघेला ने उन्हें अपना गुरु माना बल्कि चितौड़ का राजा कुंभ महारानी रत्न कुवारी भी उनके शिष्य बन गए चितौड़ की रानी मीराबाई ने भी रविदास जी को अपना गुरु माना इसलिए वे केवल संत ही नहीं बल्कि राजगुरु भी थे रविदास को गुरु रूप में स्वीकार करने का ब्रामणो निम्न जाति के संत को राजगुरु के रूप में स्थान मिले परन्तु रविदास जी प्रत्येक रूप से प्रभु कृपा द्वारा और अधिक प्रसिद्धि के साथ प्रस्तुत होते रहे धन लोभ उन्हें छू भी नहीं पाया एक बार एक संत ने परीक्षा हेतु रविदास जी को पारस पत्थर का लोभ दिया जिसे छू कर प्रत्येक वस्तु स्वर्ण में परिवर्तित हो सकती थी जब रविदास जी ने पारस पत्थर को अपनाने से इंकार कर दिया फिर भी उन्होंने उस पारस पत्थर को उनकी कुटिया में रख दिया की कभीतो लोभ आएगा परन्तु एक वर्ष पश्चात् भी वह पत्थर उसी स्थान पर संत को मिला जहाँ रखकर गए थे रविदास जी कर्म को सर्वोपरि मानते थे उन्होंने एक बार गंगा स्नान जाने के लिए संतो को इसलिए मना कर दिया क्योकि उन्होंने ग्राहक को जूता देने का वादा किया था वे शरीर से अधिक आत्मा की पवित्रता को प्राथमिकता देते थे रविदास जी की बढ़ती प्रतिष्ठता से रुष्ट होकर ब्राह्मणो ने उनकी शिकायत की l नरेश ने फैसला लिया की गंगा नदी  में  अपने इष्ट की मूर्ति प्रवहित  किया जायेगा, जिसकी मूर्ति गंगा में तैर जाएगी वे सच्चा ईश्वर भक्त होगा वैसे ही हुआ सबकी हल्की मूर्ति भी डूब गई और रविदास जी की भारी भटकन  मूर्ति तैरती रही
Sachin Kumar Sewak
                                                                                                            सचिन कुमार सेवक
                                                                                                    sachinkr4777@gmail.com

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