महात्मा ज्योतिबा फूले

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ज्योतिबा फूले का जन्म महारष्ट्र में सन 1827 में हुआ उनके पिता शेटीबा फूले व माता चिमणाबाई थी जाति व्यवस्था के अनुसार वे माली थे पारिवारिक उत्तरदायित्व के निर्वाह हेतु के फूलो का कार्य करने लगे जहाँ से उनका कुल नाम फूले हो गये ज्योतिबा फूले जब अल्पआयु में थे तभी उनकी माता का दिहांत हो गया आर्थिक व मानसिक पीड़ा के बावजूद ज्योतिबा फूले शिक्षा प्राप्ति के लिए व्याकूल रहे उनका दाखिला स्कूल में करवा दिया गया परंतु इस कदम का ब्रह्मणो द्वारा घोर विरोध हुआ धर्म नष्ट हो जाएगा पृथ्वी नर्क हो जाएगी शुद्र का शिक्षा ग्रहण सबसे बड़ा पाप है -इस प्रकार के कुतर्क दिए गय उनके पिता ने दबाव में आकर उन्हें स्कूल से निकलवा लिया अल्प आयु में ही उनका विवाह सावित्री बाई फूले से हो गया शिक्षा के प्रति जनून लगातार कायम रहा जहाँ भी अवसर मिलता किताबें पड़ते व धर्म ,जाति समानता आदि विषयो पर लोगों से विचार -विमर्श करते उनके इस जनून के कारणही उनका एक बार फिर स्कूल में दाखिला हो गया वे बहुत बुद्धिमान व ज्ञानी थे उन्होंने प्रत्येक धर्मग्रंथो का गहन अध्ययन किया दलित वर्ग का उच्च जाति के द्वारा हो रहा आर्थिक  व सामाजिक शोषण से वे बहुत आहात थे वे धर्म कर्मकाण्ड कुरीतियों पाखंडी को इसका कारण व शिक्षा को इसका समाधान मानते थे उन्होंने नारी -शिक्षा के महत्व को पहचाना और लड़कियों की शिक्षा के लिए देश की पहली पाठशाला शुरू की जब नारी -शिक्षा के लिए कोई अध्यापिका नहीं मिली तो अपनी पत्नीh सावित्रीबाई को उस काल में पढ़ाया जब शुरू के शिक्षा ग्रहण को पाप माना जाता था और उनके प्रयास व सावित्रीबाई फूले के कठोर परिश्रम से सावित्रीबाई फूले देश की पहली अध्यापिका बनी उन्होंने शिक्षा प्रयास की गति देने के लिए रात्रिकालीन पाठशाला शुरू की ज्योतिबा फूले दलित समाज के पिछड़ेपन व शोषण का कारण धर्म संबंधी अवधारणाओं को मानते थे कर्मकाण्ड पाखंड कुरीतियों पाप -पुण्य आडम्बर के वे घोर विरोधी थे क्योकि ये  ही  दलित -वर्ग के उत्थान में बाधा थे इस समस्या के हल स्वरूप उन्होंने सत्य शोधक समाज की स्थापना की इसके अंतर्गत किसी पुजारी कर्मकाण्ड दान -दक्षिण की आवयशकता नहीं थी बल्कि बहुत ही सरलता व कम  धन में क्रियाकलाप पूरा हो जाता था सत्य शोधक समाज को जनता का भरपूर सयोग मिला उन्हें विधवा विवाह का न केवल समर्थन किया बल्कि उसे व्यवहारिक रूप भी प्रदान किया समाज में फैली एक ओर कुरीति को रोकने के लिए बाल -हत्या प्रतिबंधक गृह की स्थापना की दलित समाज के उत्थान के लिए उनके अथक प्रयासों के कारण लगातार उनका सामाजिक विरोध होता रहा और उनकी हत्या का षडंयत्र रचा गया परंतु  हत्यारे ही उनके शिष्य हो गए ज्योतिबा फूले ने अपना सम्पूर्ण जीवन पर -सेवा में लगा दिया उन्होंने जात-पात  धर्म से ऊपर उठकर सभी लोगों को एक समान समझा
सचिन कुमार सेवक
sachinkr4777@gmail.comSachin Kumar Sewak

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