भारत के सात अजूबे 

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श्रवणबेलगोला या गोमतेश्वर ( कर्नाटक )
983  ई में एक ही पत्थर को तराशकर बनाई गई गोमतेश्वर की मूर्ती को बाहुबली नाम से भी जाना जाता है | श्रवणबेलगोला या गोमतेश्वर मूर्ती तक पहुंचने के लिए 618  सीढ़ियों को चढ़कर जाना होता है | धार्मिक रूप का काफी महत्व माना जाता है | जेन संप्रदाय के अनुसार संसार में सर्वप्रथम मोक्ष की प्राप्ति बाहुबली को ही हुई थी | इस मूर्ती की लम्बाई 60  फुट है | सिर्फ यही एक मूर्ति ऐसी है जो नग्न अवस्था में है | 12  वर्षों में हजारों लाखों श्रद्धालु मूर्ती का महाभिषेक करते हैं |
स्वर्ण मंदिर ( पंजाब )
सीख समुदाय का प्रमुख तीर्थ स्थल कहे जाने वाले स्वर्ण मंदिर भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में प्रख्यात है | सीख समुदाय का तीर्थ स्थल होने के साथ ही यह सीखों का सबसे पुराण गुरुद्वारा भी है | स्वर्ण मंदिर को भगवान के घर के नाम से भी जाना जाता है स्वर्ण मंदिर के चहु ओर सरोवर  है जो स्वर्ण मंदिर की शोभा में चार चाँद लगाते हैं |
ताज महल ( उत्तर प्रदेश ) 
प्यार की निशानी कहे जाने वाले ताज महल का निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहां ने मुमताज महल की प्यार की यादों में बनवाया था | ताजमहल को वास्तुकला का बेजोड़ अद्वितीय नमूना माना जाता है | ताजमहल के निर्माण का प्रमुख हकदार उस्ताद अहमद लाहौरी को माना जाता है | ताजमहल के निर्माण के लिए श्रीलंका, अफगानिस्तान से कुछ पत्थर मंगवाए थे | ताजमहल का निर्माण 17  वर्ष में पूरा हुआ था |
हाम्पी ( कर्नाटक ) 
हाम्पी में आपको भारत की लगभग हर वास्तुकला का अंश देखने को मिलेगा | यहां पर आप निगरानी के बुर्जों, अस्तबलों, बाजारों, मंदिरों, महलों, पत्थर की विभिन्न मूर्तियों का संग्रह देखा जा सकता है |
कोणार्क ( उड़ीसा ) 
कोणार्क सूर्य मंदिर को ब्लैड पगोडा नाम से भी जाना जाता है | इस मंदिर को सात घोड़ों द्वारा आकाश में ले जाते हुए बताया गया है | मंदिर के प्रारम्भ में ही सिंह ने हाथियों को पकड़े रखा दिखाया गया है |
नालंदा ( बिहार )
427  ई . से 1197  ई के दरमियान नालंदा एक बौद्ध शिक्षा का केंद्र था | खा जाता है कि यह इतिहास का सबसे पहला विश्वविद्यालय था | अपने समय में इस विश्वविद्यालय में करीब २,000  शिक्षक 10 ,000 छात्रों को अध्ययन कराते थे | इस विश्व विद्यालय में सिर्फ एक ही प्रवेश द्वार था |
खजुराहो ( मध्य प्रदेश ) 
खजुराहो मंदिर में भारत के सबसे आकर्षक वास्तुकला और मूर्तिकला  का मिश्रण का प्रतीक है | खजुराहो को भारत कि बेजोड़ कलाकारी का नमूना माना जाता है | मंदिर में लगे गुलाबी या हल्के पीले रंग के विभिन्न बलुआ पत्थर कई संप्रदाय से सम्बन्ध रखता है |

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