द्वितीय नवरात्री की नव दुर्गा

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द्वितीय नवदुर्गा : माता ब्रह्मचारिणी  

द्वितीय नवदुर्गा माँ ब्रह्मचारिणी

नवरात्र महात्यमय नवरात्र का सीधा अर्थ है वो रात्रियां जिनमे मौसम में अंतर दिखाई देता है हमारे देश में 6 ऋतुएँ होती है , परंतु दो बार ऋतुओ का प्रभाव विशेष रूप से दिखाई देता है वो है सर्दी और गर्मी शीत का प्रभाव हमे आश्विन यानी अस्सू माह से ही प्रतीत होने लगता है ज्योहि मौसम में बदलाव आता है कुछ न कुछ बीमारिया अपना प्रकोप शुरू कर देती है शरीर में खून ठंडा होना आरम्भ हो जाता है और जैसे ही गर्मी शुरू होने लगती है शरीर का खून उबलने लगता है चैत्र मास में गर्मी शुरू होने लगती है कई व्याधिया अपना रूप दिखाती है जिसे हम ऋतु परिवर्तन का संधि काल भी कहते है और वो ही राते यदि शक्ति को स्थिर रखने के लिए शक्ति उपासना में दिखाई जाये तो वो समय भक्ति आदि करने से बीत जाता, हमे कष्टनहीं होता शक्ति ही माँ दुर्गा है जिनके तीनो रूप की हम उपासना करते है वो है महाकाली, महालक्मी, महासरस्वती काली हमे काल कटंक से बचती है महलक्ष्मी धन की वर्षा करती है

माता ब्रह्मचारिणी  

Brahmacharini-Mata

 

दुर्गा जी का दूसरा अवतार (2nd Form of Navdurga): कठोर तप और ध्यान की देवी “ब्रह्मचारिणी” माँ दुर्गा का दूसरा रूप हैं। इनकी उपासना नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। देवी ब्रह्मचारिणी: ‘ब्रहाचारिणी’ माँ पार्वती के जीवन काल का वो समय था जब वे भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या कर रही थी। तपस्या के प्रथम चरण में उन्होंने केवल फलों का सेवन किया फिर बेल पत्र और अंत में निराहार रहकर कई वर्षो तक तप कर भगवान शिव को प्रसन्न किया। इनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएँ हाथ में कमण्डल है।

Mahant-Om-Nath-Sharma-Jee

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