Homeदेश विदेशअरविंद केजरीवाल के समर्थक ये पोस्ट जरूर पढें कि हकीकत क्या है?? 

अरविंद केजरीवाल के समर्थक ये पोस्ट जरूर पढें कि हकीकत क्या है?? 

 

अरविंद केजरीवाल वह पहला व्यक्ति है जो IRS अधिकारी होते हुए भी 1994 में IMS (Indian Medical Services) में आरक्षण खत्म कराने के लिए दिल्ली के AIIMS के छात्रों के साथ अनशन पर बैठा था!

1990 में मण्डल कमीशन के लागू होने से ओबीसी के आरक्षण पर खार खाए हुआ था। इसने ही यह अफवाह फैलाई थी कि आरक्षण से जो दलित, आदिवासी और ओबीसी लोग भारतीय चिकित्सा सेवा में आ जाते हैं वो इलाज नही कर पाते, रोगियों को मार देते हैं, ऑपरेशन करते हैं तो बैंडेज, रुई, पट्टी, कैंची, धागा आदि मरीज के पेट मे छोड़ देते हैं। तब इस अफवाह के खिलाफ कानपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति स्मृतिशेष प्रो. रामनाथ जी ने एक पुस्तक लिखी (किसने, किसका, कितना हक़ मारा?) और उस पुस्तक द्वारा उन्होंने इसके आरोपो का सबूत के साथ खण्डन किया कि रुई, पट्टी, बैंडेज, मरीज के पेट मे आरक्षण वाले नही बल्कि लाखो रुपये डोनेशन देकर पढ़ने वाले सवर्ण डॉक्टर छोड़ते हैं। आप यह पुस्तक सम्यक प्रकाशन से खरीद सकते हैं।

2 अगस्त 2008 को दिल्ली के जेएनयू के ताप्ती होस्टल में केजरीवाल ने आरक्षण विरोधी कार्यक्रम में जाकर आरक्षण के खिलाफ मोर्चा खोलने को लेकर योजना बनाई थी। यह कार्यक्रम यूथ फ़ॉर इक्वलिटी (Youth for Equality) फोरम नामक संगठन द्वारा आयोजित किया था। इस संगठन का गठन 2006 में आरक्षण का विरोध करने के लिए किया गया था। इस घटना पर कई बार डॉ उदित राज ने सवाल उठाया लेकिन केजरीवाल इस पर चुप्पी साधे रहता है।

लोग माहौल बनाने के लिए ट्विटर पर ट्वीट करके प्रश्न पूछते हैं। उसमें सबसे ज्यादा जवाब वही देते हैं जो उससे जुड़े होते हैं। और उस ही के आदमी होते हैं। केजरीवाल (अप्पू) ने 17 दिसंबर 2012 को ट्वीट करके पूंछा था कि “क्या सरकारी नौकरियों की प्रोन्नति में भी दलितों, पिछडो को आरक्षण होना चाहिए?”  जवाब में सभी ने कहा नही होना चाहिए क्योंकि सारे फॉलोवर सवर्ण थे।

अप्रैल 2014 में इंडिया टूडे को दिए साक्षात्कार में केजरीवाल ने कहा था कि आरक्षण सिर्फ एक पीढ़ी को मिलना चाहिए। इसका विरोध यादव शक्ति पत्रिका के संपादक चंद्रभूषण यादव जी ने इस तर्क के साथ किया था कि केजरीवाल चाहता है कि बहुजन समाज के लोग केवल एक पीढ़ी आरक्षण पाएं ताकि वो केवल चपरासी और सफाईकर्मी ही बने रहें। इस पर फिर केजरीवाल ने अप्पू (चुप्पी) साध ली।

जब केजरीवाल ने पहली बार चुनाव लड़ा तो चुनाव चिन्ह झाड़ू मिला तब इसने वाल्मीकि भाईयों को झाड़ू दिखाकर वोट लिया, उन्होंने भी इसे अपना समझ कर वोट दे दिए। यह मुख्यमंत्री बन गया। अब सफाई कर्मियों ने इससे वादा पूरा करने को कहा। तो यह चुप्पी साधे हुए है। वादा था कि ये सत्ता में आकर दिल्ली के 70 हजार नाले गटर की साफ सफाई करने वाले संविदा कर्मियों (Contractual Labour) को नियमित करके सरकारी नौकरी देगा। इसने अभी तक कुछ नही किया।*

ये रहा इसका आरक्षण विरोधी होने का सबूत। चूंकि अब ये व्यक्ति दिल्ली में दलितों, पिछड़ो और आरक्षण पाने वाले अल्पसंख्यकों का भी वोट लिया है इस लिए आरक्षण का विरोध नही करता लेकिन सरकारी नौकरियों की भर्ती भी नही निकालता! सब कुछ  प्राइवेट का प्राइवेट ही है।

अब सबूत सहित जानिए कि केजरीवाल की उत्पत्ति क्यों और कैसे की गई..??

इसको कैसे लांच किया गया..??

दिल्ली में बसपा (BSP) तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी जिसने 16% तक वोट भी प्राप्त किए! इनके 7-8 विधायक भी चुने गये। बस जरूरत थी तो दिल्ली में भी एक मुलायम सिंह के आने की। क्योंकि दिल्ली 270 गांव जाट बाहुल्य हैं और 70 गांव गुर्जर बाहुल्य हैं। ऐसी संभावना हो गयी थी कि यदि राष्ट्रीय लोकदल ने जाट गुर्जर समाज को जोड़ लिया तो ये लोग उत्तर प्रदेश की तरह गठबंधन करके लड़ेंगे! भविष्य में दिल्ली हमेशा के लिए भाजपा और कांग्रेस के हाँथो से निकल जायेगी। इस पर मंथन शुरू हुआ।

इस ही मंथन के तहत आरएसएस (RSS) ने OBC के अन्ना को लाकर एक टीम तैयार की जिसमे केजरीवाल, कुमार विश्वास, प्रो. आनंद, किरण बेदी जैसे आरक्षण के घोर विरोधियों की टीम तैयार की गई।  इस टीम ने सबसे पहले लोकपाल का राग छेड़ा और मीडिया को मैनेज करके प्रसिद्धि प्राप्त की।

इसके बाद इन लोगों ने कांग्रेस से मिली-भगत करके पहला वार कॉंग्रेस के घटक दल डीएमके (DMK) पर किया। उन दिनों कांग्रेस से जनता पीड़ित थी। यूपी का सपा-बसपा फैक्टर दिल्ली में काम करने जा रहा था। इन लोगों ने मूलनिवासी बहुजन नेता कनिमोझी और मनमोहन सरकार के मंत्री ए. राजा को फर्जी ढंग से फंसा कर जेल भेज दिया। बाद में ये लोग निर्दोष बरी भी कर दिए गए।

आप सोचेंगे ए. राजा और कनिमोझी ही क्यों? तो भाइयों थोड़ा गहराई में जाइये। यह कनिमोझी भारत के तमिलनाडु के महान नेता क्लाइग्नार करुणानिधि की बेटी हैं। ये वही डीएमके (DMK) के क्लाइग्नार थे जिन्होंने इंदिरा की चलने नही दी और राजीव गांधी और सुप्रीम कोर्ट को घुटने पर लाकर 1993 में तमिलनाडु में SC/ ST/OBC/Minority को 69% आरक्षण देकर 15% बनाम 85% का कांशीराम जी का सपना साकार किया था। राजीव गांधी की बेबसी और अपमान सोनिया गांधी नही भूली थी और इस ही लिए इनको जेल भेजा गया।

इस सब घटना क्रम के बाद केजरीवाल हीरो बन गया और इसको आरएसएस (RSS) ने आम आदमी पार्टी के नाम से लांच कर दिया। सवाल यह है कि इसे पैसा कैसे मिला। केजरीवाल को लांच करने में और अभी तक सारा चंदा और पैसा आरएसएस के अनुषांगिक संगठन ‘विवेकानंद फाउंडेशन’ ने देना शुरू किया। इस संगठन का गठन ही केजरीवाल के लिए किया गया था। इस संगठन का एक सदस्य अजमेर बम ब्लास्ट का आरोपी भी है। इसका सबूत आपको बहुजनो के अंग्रेजी समाचार साइट में मिल जाएगा।

 

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