छत्रपति शाहूजी महाराज

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छत्रपति शाहूजी महाराज का जन्म 1874 में हुआ उनके बचपन का नाम यशवंतराव था उनकी माता राधाबाई का निधन तब हो गया जब शाहूजी महाराज बालावस्था में थे उनके पिता का नाम श्रीमान जयसिंह राव अप्पा साहिब घटगे था कोलहापुर के राजा शिवजी चतुर्थ के क़त्ल के पश्चात उनकी विधवा आनंदीबाई ने उन्हें गोद ले लिया शाहूजी महाराज को अल्पआयु में ही कोल्हापुर की राजगद्दी का उतरदायित्व का वहन करना पड़ा वर्ण -विधान के अनुसार शहूजी शूद्र थे शाहूजी महाराज बचपन से ही शिक्षा व कौशल में निपुर्ण थे शाहूजी महाराज ने शिक्षा  प्राप्ति के पश्चात् भारत भ्रमन किया बल्कि वे कोल्हापुर के महाराज थे परंतु इसके बावजूद उन्हें भी भारत भ्रमन के दौरान जातिवाद के विष को  पीना पड़ा नासिक काशी व प्रयाग सभी स्थानों पर उन्हें रूढ़ीवादी ढोंगी ब्राम्हणो का सामना करना करना पड़ा वे शाहूजी महाराज को कर्मकांड के लिए विवश करना चाहते थे परंतु शाहूजी ने इंकार कर दिया समाज के एक वर्ग का दूसरे वर्ग के द्वारा जाति के आधार पर किया जा रहा अत्याचार को देख शाहूजी महाराज ने ना केवल इसका विरोध किया बल्कि दलित उद्धार योजनाए  बनाकर उन्हें अमल में भी लाए लंदन में एडवर्ड सप्तम के राज्य अभिषेक समारोह के पश्चात् शाहूजी जब भारत वापस लौटे तब भी ब्राह्मणो ने धर्म के आधार पर विभिन्न आरोप उन पर लगाए यह प्रचारित किया गया की समुंद्र पार किया है और वे अपवित्र हो गए  है शाहूजी महाराज की ये सोच थी की शासन स्वंय शक्तिशाली बन जाएगा यदि समाज के सभी वर्ग जाति के धर्म के लोगो की इसमें हिस्सेदारी हो इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सन 1902 में शाहूजी ने अतिशुद्र व पिछड़े वर्ग के लिए 50 प्रतिशत का आरक्षण सरकारी नौकरियों में दिया ब्राहम्णो की यह अवधारणा ‘शिक्षा शुद्रो के लिए नर्क के समान है पर शाहूजी ने जोरदार प्रहार किया इस कुप्रचार की समाप्ति हेतु उन्होंने कोलहापुर में शुद्रो के शिक्षा संस्थाओ की श्रृंखला खड़ी कर दी अछूतो की शिक्षा प्रसार के लिए कमेटी या गठन किया शिक्षाको प्रोत्साहन देने के लिए छत्रवृति व पुरस्कार की व्यवस्था भी करवाई यद्यपि शाहूजी एक राजा थे परंतु उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन एक समाज सेवा के रूप में व्यतीत किया समाज के दबे -कुचले वर्ग व दलित वर्ग के उत्थान के लिए कई कल्याणकारी योजनाओ का प्रारंभ किया उन्होंने देवदासी प्रथा सती प्रथा बंधुआ मजदूर प्रथ को समाप्त किया उन्होंने विधवा विवाह को मान्यता प्रदान की और नारी शिक्षा को महत्वपूर्ण मानते हुए शिक्षा का भार सरकार पर डाला मंदिरो नदियों सार्वजानिक स्थानों को सबके लिए समान रूप से खोल दिए इसके लिए शाहूजी महाराज ने डॉ,भीमराव अम्बेडकर उनके अध्यन्न व सामाजिक कार्यो के लिए कई बार आर्थिक मदद की शाहूजी महाराज के क्रांतिकारी कार्यो के प्रशंस करते हुए डॉ ,भीमराव अम्बेडकर जी ने कहा था की वह सामाजिक लोकतंत्र के जनक है
सचिन कुमार सेवक
sachinkr4777@gmail.comSachin Kumar Sewak

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