72 के स्तर तक गिर सकता है रुपया बढ़ सकती है महंगाई

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69 के स्तर को पार कर गया रुपये के इस तरह लगातार निर्बल होने से महंगाई बढ़ने विकास दर में गिरावट कीसंभावनाबढ़ गई है हालांकिसंसारके अर्थ-विशेषज्ञों का कहना है कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना मेंइंडियनअर्थव्यवस्था पर डॉलर की मजबूत तेजी काप्रभावकम होगा,

क्योंकिइंडियनअर्थव्यवस्था अभी भी कम जोखिम वाली है हिंदुस्तानके लिए अच्छा आधार यह है किहिंदुस्तानकी डॉलर पर ऋण निर्भरता कम h

इसलिए डॉलर की मजबूती का अन्यराष्ट्रोंकी तुलना मेंहिंदुस्तानपरप्रभावकम है साथ ही आर्थिक मामलों मेंहिंदुस्तानकी जो रेटिंग सुधरी हुई है,

उससे भी अर्थव्यवस्था की मुश्किलें कम लगती हैं हिंदुस्तानसे निर्यात बढ़ने की संभावनाएं बनी हुई हैं बहरहाल डॉलर के मुकाबले रुपये कीमूल्यघटने के कुछ कारण स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं

कच्चेऑयलकी कीमतों में तेजी से बढ़ते आयात बिल विभिन्न वस्तुओं के बढ़ते आयात के कारणराष्ट्रमें डॉलर की मांग बढ़ गई है इसके साथ-साथ निर्यात के अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ने विदेशी निवेशकों द्वारा नए निवेश की कमी के कारण भीराष्ट्रमें डॉलर की आवक कम हो गई है

चूंकि डॉलर में निवेशसंसारमें सबसे सुरक्षित माना जा रहा है, अतएव वैश्विक निवेशक भी बड़े पैमाने पर डॉलर की खरीदी करते दिखे रहे हैं इन सब कारणों से डॉलर कीमूल्यबढ़ गई

नि:संदेहअंतर्राष्ट्रीयमार्केटमें कच्चेऑयलकी बढ़ती कीमतें रुपये के मूल्य में गिरावट का प्रमुख कारण हैं बीते एकहफ्तेमें ही कच्चेऑयलके दाम 72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 77 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए

निकट भविष्य में भीऑयलकी कीमतों में कोई बड़ी गिरावट कीआसारनजर नहीं आती हाल ही में अमेरिका ने भारत,चाइनासहित सभीराष्ट्रोंको ईरान से कच्चेऑयलका आयात तक बंद करने के लिएबोलाहै ऐसा न करने पर अमेरिका ने आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है

हिंदुस्तानमें इराक सऊदी अरब के बाद सबसे ज्यादा कच्चाऑयलईरान से मंगाया जाता है ईरानहिंदुस्तानद्वारा यूरोपीय बैंकों के माध्यम से यूरो में भुगतान स्वीकार करता है डॉलर की तुलना में यूरो में भुगतानहिंदुस्तानके लिए लाभप्रद है

ईरान से किया जाने वाला कच्चेऑयलका आयात सस्ते परिवहन के कारणहिंदुस्तानके लिएलाभकारीहै स्पष्ट है कि यदिहिंदुस्तानद्वारा ईरान से कच्चेऑयलका आयात बंद किए जाने की नौबत आती है तो कच्चेऑयलकी खरीदी से संबंधितनयीचिंताएं सामने होंगी

यद्यपि को ऑस्टिया की राजधानी विएना में आयोजितऑयलउत्पादकराष्ट्रोंके संगठन (ओपेक) कीमीटिंगमें कच्चेऑयलके उत्पादन में आगामी जुलाई से लगभग 10 लाख बैरलरोजाना या वैश्विक आपूर्ति में एकफीसदीइजाफा करने काफैसलालिया गया, लेकिनऑयलउत्पादन में इसछोटीवृद्धि सेऑयलकी कीमतों मेंछोटीकमी ही आ सकेगी हिंदुस्तानमें बढ़े हुएऑयलमूल्य रुपये की कमजोरी का कारण बने रहेंगे

 

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