संत चोखामेला जी 

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संत चोखामेला जी भारत के उन महान संत में से एक थे जिन्होंने भगवान की भक्ति की और ऊँच-नीच जात पात जैसी सामाजिक बुराईओं का विरोध किया उनका जन्म महारष्ट्र में महार जाति  में हुआ संत चोखामेला के पूर्वजो का कार्य गाँव के हिन्दू परिवारों में मरे हुए जानवरो को उठकर गाँव से बाहर ले जाना होता था इस कार्य के लिए उन्हें किसी प्रकार की मजदूरी भी नहीं दी जाती थी उस समय काल में महारो को मंदिर प्रवेश की मनाही थी चोखामेला पर भी अपने परिवार के ईश्वर शक्ति का प्रभाव पड़ा उस समय संत नामदेव जी से प्रभावित हुए और वे पंढरपुर आ गए जहाँ पर नामदेव जी का निवास था नामदेव जी विठठ्ल भक्त थे और उनकी भक्ति श्रृद्धा से प्रभावित होकर चोखामेला ने नामदेव को ही अपना गुरु मानने लगे चोखामेला   प्रतिदिन ईश्वर की भक्ति के लिये मंदिर में प्रवेश की साफ -सफाई करते परंतु महान होने के कारण उन्हें मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं थी परंतु सभी कष्टों व  उपेक्षाओ के बावजूद वे लगातार भक्ति में समर्पित रहे उन्होंने कई अभंग लिखे है इस कारण  उन्हें पहला दलित -कवि कहा गया उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर ईश्वर उन्हें मंदिर के अंदर ले गए और अपने साक्षात् दर्शन दिए वे सामाजिक -धार्मिक असमानता को अपने अभंगो के द्वारा घूम -घूम कर समाज के सामने रखते उन्होंने कई अभंगो की रचना की जिसमे भक्ति और धर्म व  जाति के आधार पर भेदभाव प्रधान विषय रहे उनके कुछ महत्वपूर्ण अभंग 1. सुख अनुपम सताए   2.  विट्ठल विट्ठल गजरी
सचिन कुमार सेवक
sachinkr4777@gmail.comSachin Kumar Sewak

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