श्री जगन्नाथ रथ यात्रा

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श्री जगन्नाथ रथ यात्रा

रथ यात्रा, ये भारत में हिन्दू धर्म से जुड़ा हुआ है यह एक हिन्दू का त्यौहार है जो प्रभु जगन्नाथ से जुडा हुआ है, और विश्व प्रसद्ध तरीके से पूरी, ओडिशा, और भारत में मनाया जाता है। रथ यात्रा दर्शन भारत के साथ-साथ दुसरे देशों में भी मनाया जाता है। इस भव्य त्यौहार को भारत के दूरदर्शन चैनल पर सीधा प्रसारण भी दिखाया जाता है।

और इस भव्य त्यौहार को मनाने के लिए पुरे विश्व भर से लोग पूरी पहुँचते हैं जो बडदांड चौक, पूरी में है। रथ यात्रा त्यौहार के दिन भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और छोटी बहन सुभद्रा के रथ को श्रद्धालु खिंच कर मुख्य मंदिर जगन्नाथ मंदिर से उनकी मौसी के घर गुंडीचा मदिर ले कर जाते हैं।

वहाँ तीनो रथ 9 दिन तक रहते हैं। उसके बाद इन तीनो रथ की रथ यात्रा वापस अपने मुख्य जगन्नाथ मंदिर जाती है जिसे बहुडा जात्रा कहा जाता है।

तीनों रथ, जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा के रथ प्रति वर्ष नए बनाये जाते हैं। इन तीनों रथ को इनके यूनिक तरीके से सजाया जाता जो की सदियों से एक ही प्रकार एक ही रंग में सजाया जाते रहा है।

इनकी हर सजावट में वहीँ बडदांड में ही होती है और इनकी लाल रंग का ध्वजा और चमकते हुए पीले, नील, काले रंग को देकते ही आप प्रभु की ओर मोहित हो जायेंगे। इनकी सजावट मंदिर के मुख्य द्वार जो की मदिर की पूर्व दिशा में है, उस जगह किया जाता है।

जगन्नाथ मंदिर में हिन्दुओं को ही घुसने की अनुमति है, परन्तु यही वो दिन है जिस दिन हर एक जाती और दुसरे देशों से आये हुए लोगों को भी प्रभु को देखने का मौका मिलता है। विश्व भर से पूरी रथ यात्रा पर आये हुए भक्त और श्रधालुओं की बस एक ही कामना होती है कि उन्हें एक बार प्रभु के रथ को रस्सी से खीचने का मौका मिले।

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