शनि देव  महाराज का  शिंगणापुर धाम

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शनि महाराज का शिंगणापर पुर धाम  महाराष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित है ।इस धाम का विशेष  महत्व है   यहां पर शनि महाराज की कोई मूर्ति स्थापित  नहीं है बल्कि  प्रचीन समय से एक  बड़ा सा काला पाषाण  है जिसे शनि का विग्रह माना जाता है। और उसकी पूजा की जाती है
शनि के प्रकोप से मुक्ति पाने के लिए लोग  देश विदेश से यहां आते हैं और शनि विग्रह की पूजा करके उन्हें खुश करके  शनि देव  के कुप्रभाव से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। माना जाता है कि यहां पर शनि महाराज का तेल के साथ अभिषेक  करने वाले को शनि कभी कष्ट नहीं देते।और उनकी कृपा सदा उन पर बनी रहती है
यहाँ  पर पूजा करने के कुछ नियम है चूँकि शनि देव ब्रह्मचारी थे इसलिए महिलाये उनकी पूजा दूर से खड़े होकर करतीं है और पुरुष स्नान करके गीले कपडों में शनि देव की आराधना करतें हैं
यह  कहा जाता है की इस गांव में कभी चोरी नही होती इस गांव की रक्षा शनि देव का पाषाण करता है कहा जाता है इस गांव में लोग अपने घरों में ताला नही लगाते फिर भी इनके घरों में से एक कील भी गायब नही होती  इसके आलावा यह भी कहा जाता है की अगर किसी व्यक्ति को सांप ने काट लिया हो तो उस व्यक्ति को शनि देव के पाषाण के पास ले जाया जाता है और सांप का जहर अपने आप बेअसर हो जाता है
शनि मराहाज के शिंगणापुर में होने की कहानी बहुत ही रोचक और अद्भुत है सदियों पहले शिंगणापुर में खूब वर्षा हुई। वर्षा के कारण यहां बाढ़ की स्थिति उत्पन्न  हो  गई। लोगों को लग रहा था की वर्षा प्रलय लेकर आएगी  इसी बीच एक रात शनि महाराज एक गांववासी के सपने में आए।
 उस गांव वासी से  शनि महाराज ने कहा कि मैं पानस नाले में विग्रह रूप में मौजूद हूं। मेरे विग्रह को उठाकर गांव में लाकर स्थापित करो। फिर  सुबह इस व्यक्ति ने गांव वालों को यह बात बताई।और गांव के लोग पानस नाले पर गए और वहां मौजूद शनि का विग्रह देखकर सभी आश्चर्यचकित रह गये।
गांव वाले मिलकर उस विग्रह का उठाने लगे लेकिन विग्रह हिला तक नहीं, सभी असमर्थ रहे , सभी हारकर वापस गांव  लौट आए। शनि महाराज फिर उस रात उसी व्यक्ति के सपने में आये और बताया कि कोई मामा भांजा जब  मिलकर मुझे उठाएंगे  तो ही मैं उस स्थान से उठूंगा। और साथ ही  मुझे उस बैलगाड़ी में बैठाकर लाना जिसमें लगे बैल भी मामा-भांजा हों।
अगले दिन जब  उस व्यक्ति ने यह बात गांव वालों को  बताई तब एक मामा भांजे ने मिलकर विग्रह को उठाया। और  बैलगाड़ी पर बिठाकर शनि महाराज को गांव में लाया गया और उस स्थान पर स्थापित किया गया जहां  वर्तमान में शनि विग्रह मौजूद है। इस विग्रह की स्थापना के पश्चात्  गांव की समृद्घि और खुशहाली बढ़ने लगी।

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