रमजान में मस्जिदों से दागे जाते है तोप के गोले 

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दुनिया भर में रमजान की तैयारियां शुरू हो चुकी है विविधता में एकता वाले देश भारत में रमजान के कई रंग देखने को मिलते है रोजा इफ्तार और सहरी पर हर शहरो की अपनी परंपराओं का असर दिखता है मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से जुड़ी रमजान की एक अनोखी परम्परा आज भी कायम है रायसेन स्थित मस्जित में  पारंपरिक तोप से गोले दागकर लोगो को चाँद दिखने की सुचना दी जाती है चाँद का दीदार करने के बाद शहर के काजी मस्जिदों से बारूदी गोले दागते है जिसकी आवाज सुनकर लोग समझ जाते है कि अगले मे रोजा रखना है इतना ही नहीं पूरे रमजान  में मस्जिद से गोले दागे जाते है जिसकी आवाज सुनकर लोग सहरी और इफ्तार का वक्त जान पाते है ख़बर के मुताबिक इस बार मस्जिद कमेटी ने रमजान के लिए खास तरह के गोले मंगवाए है इन्हे दागे जाने पर रंगीन धुआं निकलेगा मिस्जद कमेटी के प्रभारी यासिर अराफात ने बताया कि भोपाल के आलावा सीहोर व रायसेन जिलों कि मस्जिदों में ये गोले भेजने का जिम्मा मस्जिद कमेटी के पास है कमेटी भोपाल में 50 सीहोर में 30 व रायसेन जिले में 20 मस्जिदों को गोले बजती है रमजान  पर हर मस्जिद को करीब 60 गोले दिए जाते  है माहे रमजान में दागे जाने वाले गोले का खर्चा मस्जिद कमेटी उठाती है रमजान में इसे चलाने के लिए स्थनीय डी .एम . से खसतौर से लाइसैंस लिया जाता है बताया जाता है कि रायसेन के किले में रखी पुरानी तोप से ही सारे गोले दागे जाते है

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