यहाँ भूल के भी ना जाये जहां बसती हैं रुहानी ताकतें (जैसलमेर)

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यहाँ भूल के भी ना जाये जहां बसती हैं रुहानी ताकतें (जैसलमेर)

जैसलमेर:- (जैसलमेर) के कुलधरा गांव के बारे में सुना है ? राजस्थान का ये गांव सिर्फ देश में ही नही बल्कि विदेश में भी प्रसिद्ध है। इस गांव के मशहूर होने की वजह है यहाँ इसका डरावना मंजर। है दरअसल कुलधरा को हॉन्टेड विलेज (भूतहा गांव ) के रूप में जाना जाता है। भानगढ़ के किले की तरह यह गांव भी अचानक ही एक रात में वीरान हो गया। उस रात के बाद इस गांव में कोई बस नहीं पाया। इस गांव के इस सूनेपन के पीछे भी इसकी एक अजीब दास्तान छुपी हुई है थार मरुस्थल के बीच में बसे इस गांव में कई रहस्यमयी किंवदंदियां प्रसिद्ध है

ये गांव जैसलमेर शहर से 18 किमी. की दूरी पर स्थित है। पूरी तरह से सुनसान पड़ा ये गांव पहले खंडहर नही था बल्कि इसके आसपास के 80 गांव पालिवाल ब्राह्मणों से आबाद हुआ करते थे। लेकिन यहां कुछ ऐसा हुआ कि सभी गांव वाले इस जगह को वीरान करके चले गये। तब से ये गांव आज तक सुनसान पड़ा है।
पौराणिक कथा के अनुसार कभी लोगों से आबाद रहने वाले इस गांव को किसी की बुरी नजर लग गई। वो व्यक्ति था रियासत का दीवान सलीम सिंह। गांव के एक पुजारी की बेटी पर सलीम सिंह की बुरी नजर पड़ी। सलीम सिंह ने उस लड़की से जबरन शादी करने के लिए गांव वालों को चंद दिनों की मोहलत दी। ये लड़ाई जितनी एक बेटी के सम्मान की थी, उतनी ही गांव वालों के आत्मसम्मान की भी। इसी मुद्दे को लेकर गांव की चौपाल पर पालिवाल ब्राह्मणों की बैठक हुई और 5000 से ज्यादा परिवारों ने अपने सम्मान के लिए रियासत छोडऩे का फैसला ले लिया। अगली शाम कुलधरा कुछ यूं वीरान हुआ, कि आज परिंदे भी उस गांव की सरहदों में दाखिल नहीं होते। कहते हैं गांव छोड़ते वक्त उन ब्राह्मणों ने इस जगह को श्राप दिया था कि इस जगह पर कोई भी रहने में सक्षम नहीं होगा। तब से लेकर आज तक ये वीरान गांव रूहानी ताकतों के कब्जे में है, जो अकसर यहां आने वालों को अपने होने का अहसास कराती हैं।

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