मोदी ने कहा किन्नरों को हिजड़ा कहने पर मिलेगी सजा |

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मोदी ने कहा किन्नरों को हिजड़ा कहने पर मिलेगी सजा |

ये तो आप जानते है लोग किन्नरों को हिजड़ाऔर गलत-गलत नामो से पुकारते है उनको कोई इज्जत सम्मान नही देते है उन्हें बहुत ही गिरी हुई निगाहों से देखते है लेकिन उनकी इसमें की गलती है वो तो भगवान की देन है तो अब ऐसा नही होगा उन्हें भी वही मान सम्मान मिलेगा जो हर महिला को मिलता है

इसीलिए सर्वोच्च अदालत से दायर आवेदन में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने कहा है कि हिजड़ा शब्द अपमान जनक है। किन्नर इस शब्द से घृणा करते हैं। ऐसे में इस शब्द का प्रयोग उचित नहीं है।

और किन्नरों को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता देने और उन्हें ओबीसी का दर्जा देने के सर्वोच्च अदालत के फैसले में केंद्र सरकार ने कई खोट निकाले हैं। किन्नरों को हिजड़ा कहे जाने पर अब कड़ा ऐतराज जताते हुए सरकार ने सर्वोच्च अदालत से फैसले में संशोधन करने का आग्रह किया है।

साथ ही ये भी कहा है कि सभी किन्नरों को ओबीसी का दर्जा नहीं दिया जा सकता क्योंकि किन्नर जन्म से दलित और आदिवासी होते है, ऐसे में ओबीसी का दर्जा देने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश जरूरी है। ताकि वो भी आम लोगो की तरह अपनी जिंदगी जी सके |

और इस फैसले में संशोधन समेत तमाम पहलुओं को स्पष्ट करने की मांग करते हुए आवेदन में सरकार ने कहा है कि विशेषज्ञ समिति ने किन्नरों को लेकर एक रिपोर्ट इस साल 27 जनवरी को पेश की थी। केंद्र ने समलैंगिकों को किन्नरों की श्रेणी में रखने पर आपत्ति दर्ज की है। उन्हें किन्नर (ट्रास्जेंडर) नहीं कहा जा सकता।

याद रहे कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 15 अप्रैल के फैसले पर यह आवेदन दायर किया है। और अदालत ने भी किन्नरों को तीसरे वर्ग के रूप में मान्यता देने के लिए सरकार को छह माह का समय दिया था। सरकार ने ये कहा कि किन्नर किसी जाति के रूप में अपनी पहचान नहीं रखते। उन्हें अन्य पिछड़ी जाति का दर्जा कैसे दिया जा सकता है।

सरकार ने इंद्रा साहनी मामले में सर्वोच्च अदालत के फैसले का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है कि आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता और ओबीसी में वर्गों का निर्धारण पिछड़ा वर्ग आयोग करेगा।

पर मोदी सरकार से की संशोधन की मांग :-
मोदी सरकार ने यह भी कहा है कि हो सकता है किन्नर सामाजिक परिस्थितियों के कारण अपने परिवार से अलग हो गए हों। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने कोई अन्य जाति अपना ली है। जाति जन्म से निर्धारित होती है। उन्हें एक वर्ग के रूप में ओबीसी के रूप में मान्यता देना राजनीतिक रूप से समस्या पैदा कर सकता है।

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