मिडे मील से बच्चे हो रहे है बीमार सरकार नहीं दे रही है ध्यान

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बच्चो  के मिड डे मील का जहा तक सवाल है भारत सरकार अपनी भरसक कोशिश  मे है कि किसी भी तरह बच्चो को अच्छा भोजन व नास्ता दें जिससे उनके स्वास्थ्य जीवन पर अच्छा असर पड़े लेकिन आये दिन कुछ न कुछ घटनाये सुनने में आती रहती है ! आज की आज तक न्यूज़ चैनल ने बताया कि मिड डे मील में चूहे  मिले जिससे कुछ बच्चो क़ी तबियत ख़राब हो गई और उन्हे अस्पताल ले जाना पड़ा !
इस तरह क़ी घटनाए थमने का नाम नहीं ले रही कही न कही बच्चो को अनहोनी का शिकार होना पड़ता है ! अगर हम पूरे ब्यौरे  को  देखे तो ऐसा लगता है क़ि मिड डे मील से अच्छाई क़ी बजाय दुर्घटनाए या अनहोनी क़ि ज्यादा खबरे आ रही है !
इन सब पहलुओ पर विचार डाला जाये तो मिड डे मील क़ी जगह पर उनको रूपये का प्रबंध किया जाये तो बेहतर  होगा और उन रुपयो से अभिभावक अपने सामने अपने बच्चो को खाना  दें सकते है क्योंकि सारे दिन भी तो अभिभावक ही खाना देते है तो क्यों सरकार इन बुराइयो में पड़ती है ! इसका ये भी मतलब होता है क़ि इस मिड डे मील के साथ और भी रहस्य  हो सकते  है जैसे  सरकार के खुद के ठेकेदार हो और उन्हें लाभ देने के लिए ये स्कीम बनाई हो
अगर ऐसा नहीं है तो इस ठेकेदारी को तुरंत ख़त्म किया जाये और अभिभावकों को भोजन देने क़ि बजाय रूपये दिए जाये जिससे ठेकेदारी प्रथा खत्म हो और जनता का पैसा जनता तक ठीक प्रकार से उपयोग में आ सके ! हमारे प्रधानमंत्री महोदय जी ने हर व्यक्ति का  खाता खुलवा दिया है अतः यह पैसा उनके खाते में ही डाला जाये इससे बच्चो को लाभ मिलेगा ! ऒर भीख से छुटकारा भी मिलेगा !
हमारे प्रधानमंत्री महोदय अपारदर्शी है अतः वे इसे अवश्य अमल में लेने  का प्रयास करेंगे ऐसी उम्मीद क़ी जाती है ! दूसरा इसका एक बहुत ही दूरगामी दृश्य है वह है क़ी हम अपनी गरीब जनता के बच्चो के हाथ  में भीख का कटोरा थमा रहे है  कि सुबह बच्चे पढ़ने  क़ी बजाय कटोरा लेकर खड़े हो जाते है और कटोरा में भीख के रूप में खाना लेते  है ! इससे न सिर्फ मानसिकता  पर फर्क पड़ता है बल्कि बचो क़ी पढ़ाई पर भी सबसे अधिक फर्क  पड़ता है ! आशा है हमारे प्रधानमंत्री महोदय इस ऒर अवश्य ध्यान देंगे ! और बचो को भीख न देकर शिक्षा पर ध्यान देंगे

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