मायावती के दलितों ने चुनाव के दौरान क्यों छोड़ा साथ |

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मायावती के दलितों ने चुनाव के दौरान क्यों छोड़ा साथ |

हम आपको बता दे की उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में छह विधानसभा सीट हैं. इनमें से केवल एक – शाहजहांपुर शहर – में ही पिछले करीब 20 सालों से लगातार भाजपा को मिलती रही है |

और इस बार भी कुछ ऐसे ही नतीजे की उम्मीद की जा रही थी की, लेकिन हुआ बिलकुल उल्टा ही हुआ. शाहजहांपुर की छह में से पांच सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज कर ली और सपा को केवल एक ही सीट से संतोष करना पड़ा | अब सवाल यह खड़ा होता है कि कभी जिन लोगों के सामने मायावती की थोड़ी सी बुराई करना भी मधुमक्खी के छत्ते को छेड़ने जैसा था आज उन्हीं लोगो ने मायावती का साथ कैसे छोड़ दिया?

दलितों पर अन्य समुदायों को प्राथमिकता :-
बाल्मीकि समाज से आने वाले मटरू लाल के स्वास्थ्य विभाग में काम करते हैं. उनका यह मानना है कि मायावती को भले ही दलितों का मसीहा माना जाता हो | लेकिन उन्होंने दलितों के लिए कुछ करने के बजाय उल्टी उनकी बदहाली ही कर दी. और वे कहते हैं | कि मायावती ने सफाई विभाग के लिए भर्ती निकाली तो इनमें सवर्णों, यादवों और अन्य जातियों को भी मौका दिया गया. इसका नतीजा ये हुआ कि बाल्मीकि समाज को इन नौकरियों का 10 फीसदी हिस्सा ही मिला |

उज्ज्वला योजना का कमाल :-
इसीलिए दलितों के भाजपा में जाने की वजहों में से एक केंद्र सरकार की उज्जवला योजना भी है. शाहजहांपुर में दलितों के गांव जाने पर इसकी जमकर तारीफ सुनने को मिलती है, यहां की एक दलित महिला कहती हैं, ‘हमने जिंदगी भर लकड़ी और कंडों (उपलों) के सहारे खाना बनाया था |

लेकिन अब मोदी जी ने हमारे घर में गैस लगवा दी. इस वजह से हमने अपने सभी रिश्तेदारों से भी मोदी को वोट देने के लिए कहा था, कई अन्य लोग भी मानते हैं कि चुनाव में इस योजना का काफी ज्यादा असर पड़ा क्योंकि इसका सबसे ज्यादा लाभ पिछड़ा और दलित वर्ग को ही मिला है |

अखिलेश सरकार भी एक कारण :-
और शैलेंद्र कुमार शाहजहांपुर के ग्रामीण इलाकों में पिछले 25 वर्षों से अध्यापन का कार्य करते हैं. इसीलिए दलितों के भाजपा में जाने का एक बड़ा कारण वे अखिलेश सरकार को भी मानते हैं. शैलेंद्र ने कहा, कि 2015 में अखिलेश सरकार ने राजस्व कानून में संशोधन करके दलितों को अपनी भूमि गैर दलितों को बेचने का अधिकार दे दिया| वे कहते हैं कि हो सकता है कि नॉएडा और लखनऊ जैसे शहरों में दलितों को इससे फायदा हुआ हो लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों में इससे उनकी मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ गयी हैं |

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