भक्त नामदेव जी 

0
589
नामदेव जी का जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले में नारसीबामणी नामक गाँव में हुआ यह एक दर्जी परिवार था उनके पिता का नाम दमाशेटी व माता का नाम गोणाई देवी था नामदेवी जी की शादी छोटी उम्र में ही हो गई थी परंतु उनका मन व्यपार कार्य में कभी नहीं लगा वे गाँव के मंदिर में ही जाकर साधु संतो के साथ बैठते और भजन -कीर्तन करते थे उनका मन बैरागी व संत स्वभाव का हो गया था संत नामदेव ने पूरे महाराष्ट्र का भ्रमण करते हुए अपनी रचनाओं के माध्यम से समता व समानता तथा प्रभु प्रेम का पाठ पढ़ा नामदेव जी संत ज्ञानेश्वर के समकालीन थे नामदेव व ज्ञानेश्वर जी ने उतर भारत का  भ्रमण करते हुए प्रभु भक्ति का व ऊँचे -नीचे मिटाने हेतु प्रयास रचनाओं व गीतों के माध्यम से किया नामदेव महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत हो गए थे ज्ञानेश्वर के समाधि लेने के पश्चात् नामदेव जी महाराष्ट्र से पंजाब आ गए उन्होंने मराठी के साथ हिन्दी में भी रचनाएँ लिखी उनकी कुछ रचनाएँ सिक्खो की धार्मिक पुस्तकों में भी मिलती है एक बार किसी कार्यवश नामदेवी जी के पिता को बाहर जाना पड़ा तो वह नामदेव जी को निर्देश देकर गए की तुम ठाकुर जी सेवा करोगे जैसे मंदिर की सफाई व ठाकुर जी को दूध पिलाना आदि किसी प्रकार की कोई लापहरवाही न हो इस बात का भी ध्यान रखना वरना ठाकुर जी नाराज हो जाएगे नामदेवी जी ने वैसा ही किया और दूध का कटोरा भरकर ठाकुर जी के सम्मुख रखा और हाथ जोड़कर प्रतीक्षा करने लगे की ठाकुर जी किस तरह दूध पीते है पत्थर की प्रतिमा भला कैसे दूधपान करती नामदेव जी को इस बात का ज्ञान नहीं था की चम्मच भर दूध प्रतिमा को स्पर्श कर शेष दूध पंडित पी जाते है इस बात से बेखबऱ नामदेवी जी ने विनम्र प्रार्थना शुरू कर दी प्रभु यदि ये छोटे से सेवक ने कभी पाप नहीं किया निस्वार्थ भक्ति प्रार्थना आराधना से प्रसन्न होकर अन्नत;प्रभु प्रतिमा में प्रकट हुआ और हँसकर दूध ग्रहण किया इस प्रकार नामदेव जी ने प्रभु के साक्षात दर्शन किए
सचिन कुमार सेवक
sachinkr4777@gmail.com Sachin Kumar Sewak

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here