बेटी भार नहीं “आधार” है

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  • हमारी भारत सरकार एक ओर तो बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओ का नारा हर व्यक्ति से सुनना चाहते है ओर हर दीवार पर लिखवा दिया है कि “बेटी बचाओ ओर बेटी पढ़ाओ”   लेकिन जब बात असलियत की हो तो नज़ारा कुछ और ही होता है ! जहा तक शिक्षा का सवाल है हमारे देश में एक ही ऐसा एक मेडिकल कॉलेज है जो केबल लड़कियों के लिए ही है . लेकिन इस लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के बारे में सोचा जाए तो सरकार का उदाशीनता का प्रमाण  मिलता  है !
  • इस कॉलेज के विस्तार के लिए 4  साल से चल रहे कार्य को अधूरा छोड़ दिया गया है जो विक्तीय साधनो के कारण अधवर में  पड़ा है  इसका अधूरा काम 5  टॉवरों का  निर्माण कार्य इस साल पूरा होना था लेकिन जैसा का तैसा रूका पड़ा है ! इन मुख्य ५ टॉवरों  का निर्माण  2012  में इस मेडिकल कॉलेज के मरीजो के इलाज के लिए कैंसर सेंटर ; आईपेड ब्लॉक,  ओपीडी ब्लॉक इमरजेंसी ब्लॉक,  और अकैडेमिकब्लॉक ब्लॉक का निर्माण सुरू हुआ था लेकिन ये कार्य वितीय साधनो के कारण ज्यी का त्यों रूका पड़ा है
  • अब सवाल यह  होता  कि बेटियो के लिए हम कितने संसाधन जुटा सकते है इसका प्रमाण  इस निर्माण के द्वारा लगाया जा सकता है  कि हर बार बजट  की रुपरेखा रखी जाती है लेकिन वही धाक के तीन पात वाली कहावत यहाँ पर सिद्ध होती है  !
  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान मात्रा से काम नहीं चलता बल्कि इस पर  अमर करने की आवशकता है मालूम होना चाहिए कि 2016  में इस मेडिकल कॉलेज  ने अपने १०० साल पुरे  किये है और यहाँ से हर साल 250  लड़कियां MBBS , पास करके डॉक्टर की उपाधि लेती हैं इसलिए इस मेडिकल कॉलेज ने  अग्रहणी की भूमिका निभाई है ! परंतु जनशंख्या की वृद्धि के कारण तथा नए  उपकरणो से लैस होने के लिए पूरानी बिल्डिंग पूरी तरह असमर्थ है अतः भारत सरकार  इसमें रूचि लेने के लिए भी कदम उठाने  चाहिए  जिससे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ  का अभियान  पूरा हो सके !

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