बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे के साथ साथ बेटो में भी अच्छे संस्कार पैदा करने जरुरी

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क्या हमारे देश में लड़किया सुरक्षित है लड़कियों पर अत्यचार बढ़ते ही जा रहे है आज कल के समय में लड़किया अपने घर में भी सुरक्षित नहीं है

घरो में नन्ही लड़कियों को देवी माना जाता है केवल हिन्दू ही नहीं बल्कि सभी धर्मो में बच्चियों को एक विशेष दर्जा दिया जाता है

फिर भी हाल ही में 3 नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएँ यह दर्शाती है की क्रूरता तथा दुराचार बढ़ाता जा रहा है

यह आंकड़ा पूर्णतया गुमराह करने वाला है और सच से बहुत दूर है। तथ्य यह है कि देश में कई कारणों से दुष्कर्म तथा महिलाओं के खिलाफ अन्य अपराध 5 प्रतिशत से भी कम दर्ज किए जाते हैं।

अब जबकि महिलाओं सहित लोग खुल कर सामने आने लगे हैं, अधिक मामले दर्ज किए जाने लगे हैं लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे मामले दर्ज नहीं किए जाते।

आंकड़ों पर गौर न भी करें तो क्या चीज इस क्रूर तथा अमानवीय अत्याचार के लिए लोगों की मानसिकता को प्रेरित करती है

जो हाल ही में सामने आए कुछ मामलों की विशेषता बन गई है जिनमें जम्मू क्षेत्र के कठुआ की 8 वर्षीय आसिफा भी शामिल है।

रिपोट्स के अनुसार, जिनमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी शामिल है, बच्ची की हत्या करने से पहले एक सप्ताह से अधिक समय तक उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया गया और उसे पीटा गया।

उसके नन्हे शरीर पर बड़ी संख्या में जख्मों के निशान उस क्रूरता की गवाही दे रहे थे जिससे बड़ी उम्र के व्यक्तियों ने उसके साथ व्यवहार किया, जिनमें पुलिस कर्मी भी शामिल था, जिसकी शादी कुछ महीने पहले ही हुई थी।

यह विशेष घटना इस कारण से भी देश के लिए शर्म की बात बनी हुई है कि आरोपी की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारी, जो इसे एक साम्प्रदायिक रंग देना चाहते थे, उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज भी फहराए जैसे कि वे एक ‘राष्ट्रवादी’ प्रदर्शन कर रहे हों।

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