बाबरी मस्जिद और अयोध्या विवाद के बारे में उच्चतम न्यायलय का सुझाव

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बाबरी मस्जिद और अयोध्या विवाद के बारे में उच्चतम न्यायलय का सुझाव

प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर ने बाबरी मस्जिद और अयोध्या विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने पर अपना विचार दिया है | खंडपीठ की अध्यक्षता कर रहे खेहर ने आपसी सहमति पर जोर देकर कहा है कि आपसी समझौते समाज में शान्ति व्यवस्था को ठीक रखते है | आपसी सहमति में आपस में मिलजुल कर आदान प्रदान वाली कहावत को भी उचित ठहराया जा सकता है जिसके माध्यम से किसी को कुछ कम या किसी को कुछ अधिक देना व लेना पधयन्ती को अपनाया जा सकता है | इससे न केवल शांति बल्कि आपसी विचार धारा को भी बल मिलता है |

इस बारे में आपको बता दे कि 2010 में इलाहबाद उच्च न्यायलय ने विबादित स्थल जो लगभग 2 .77 एकड़ में है को तीन हिस्सो में विभाजित करने का फैसला सुनाया था ! राम लला, निर्मोही अखाडा और सुन्नी वक्फ बोर्ड को बराबर की हिस्सेदारी पर जोर दिया था जिसको तीन न्यायाधिसो की पीठ ने सुनाया था | लेकिन उच्च न्यायलय ने धार्मिक फैसले को आपसी समझौते के द्वारा हल करना सवोत्तम उपाय ही बताया है | धार्मिक मुद्दों पर जोर जबरदस्ती फैसले नही सुनाने चाहिए और न इसका ये हल हो सकता है इससे कटुता बढ़ती है इसलिए आपसी समझौते ही धार्मिक हल होते है जिससे आपसी सौहार्द बना रहे जिससे आपस में सब मिलजुल कर रह सके |

इस बारे में बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने उच्चतम न्यायलय से शीघ्र निपटारा करने की अपील की थी |
जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आप स्वमं इस बारे में आपसी समझौते की शुरुआत कर सकते है और दोनों पक्षो की राय ले सकते है अगर जरूरत पड़े तो न्यायलय भी इसमे मध्यस्ता कर सकता है और पूरा सहयोग करने में मददगार होगा |

सर्वोच्च न्यायलय ने सुब्रमण्यम स्वामी को 31 मार्च का समय भी दिया है और कहा है कि अगर दोनों पक्ष चाहे तो प्रधान वार्ताकार भी रख सकते है | उन्होंने यहाँ तक कहा है कि अगर मेरी मध्यस्था चाहे तो में स्वमं भी मध्यस्था में सामिल हो जाऊंगा लेकिन इसका हल निकलना चाहिए |

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