नाक से टाइपिंग कर बनाया था वर्ल्ड रिकार्ड

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नाक से टाइपिंग करने में माहिर विनोद कुमार को आज स्थायी नौकरी तक नसीब नहीं है। विनोद एक बार नहीं 4 बार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवा चुके हैं। बावजूद इसके उसे सरकार की तरफ से कोई प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है।

विनोद आंखे बंद कर टाइपिंग करने, नाक से टाइपिंग, मुंह पर स्टिक रखकर टाइपिंग और एक उंगली से टाइपिंग करने में माहिर है। उन्हें वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी लंदन से वाइस चांसलर ने पीएचडी की उपाधि भी दी गई है।

विनोद जेएनयू में लगभग 6 साल से पर्यावरण विज्ञान संस्थान में कॉन्ट्रैक्ट (ठेके) पर डेट एंट्री ऑपरेटर की नौकरी कर रहे है। लेकिन हमेशा से यह डर लगा रहता है कि कब उनको नौकरी से निकाल दिया जाए।

यही वजह है कि उन्होंने स्थायी नौकरी के लिए मुख्यमंत्री, उपमुख्मंत्री से लेकर जेएनयू कुलपति को भी पत्र लिख चुके है। लेकिन अभी तक उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।

विनोद ने बताया कि उन्हें स्पीड में हमेशा से रुचि थी, वह एक एथलीट बनना चाहता थे। उन्होंने इसके लिए कड़ी मेहनत की लेकिन स्वास्थ्य समस्याओं के चलते यह मुमकिन नहीं हो पाया। इसके बाद उन्होंने जेएनयू में डेटा एंट्री ऑपरेटर के तौर पर काम करना शुरू किया। जहां उन्हें एहसास हुआ कि वह टाइपिंग स्पीड में कई रिकॉर्ड बना सकता हैं।

बता दें, 38 साल के विनोद कुमार ने सोशियोलॉजी में ग्रेजुएशन की है। वह अपने घर में गरीब और दिव्यांग बच्चों को कंप्यूटर सिखाते हैं। विनोद ने बताया शुरुआत में लोगों ने उनकी टाइपिंग को लेकर काफी मजाक भी बनाया

लेकिन अब यही स्किल उनकी खासियत बन गई है। वह नाक से कमाल की टाइपिंग करते है। टाइपिंग करते समय दोनों हाथ पीछे बांध लेते हैं और की-बोर्ड को नाक से चलाते हैं।

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