डॉ भीमराव अम्बेडकर के अनमोल विचार

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  • शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो.

  • एक सुरक्षित सेना एक सुरक्षित सीमा से बेहतर है.

  • राजनीतिक अत्याचार सामाजिक अत्याचार की तुलना में कुछ भी नहीं है और एक सुधारक जो समाज को खारिज कर देता है वो सरकार को खारिज कर देने वाले राजनीतिज्ञ से ज्यादा साहसी हैं.

  • समानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत रूप में स्वीकार करना होगा.

  • जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते, कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है वो आपके लिये बेमानी है.

  • यदि मुझे लगा कि संविधान का दुरुपयोग किया जा रहा है, तो मैं इसे सबसे पहले जलाऊंगा.

  • उदासीनता लोगों को प्रभावित करने वाली सबसे खराब किस्म की बीमारी है.

  • यदि हम एक संयुक्त एकीकृत आधुनिक भारत चाहते हैं तो सभी धर्मों के धर्मग्रंथों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए.

  • एक सफल क्रांति के लिए सिर्फ असंतोष का होना काफी नहीं है. जिसकी आवश्यकता है वो है राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों के महत्व, जरुरत व न्याय में पूर्णतया गहराई से दोष.

  • लोग और उनके धर्म; सामाजिक नैतिकता के आधार पर सामाजिक मानकों द्वारा परखे जाने चाहिए. अगर धर्म को लोगों के भले के लिये आवश्यक वस्तु मान लिया जायेगा तो और किसी मानक का मतलब नहीं होगा.

  • हर व्यक्ति जो मिल का सिद्धांत जानता हो कि एक देश दूसरे देश पर राज करने में फिट नहीं है, उसे ये भी स्वीकार करना चाहिये कि एक वर्ग दुसरे वर्ग पर राज करने में फिट नहीं है.

  • इतिहास बताता है कि जहाँ नैतिकता और अर्थशास्त्र में संघर्ष होता है वहां जीत हमेशा अर्थशास्त्र की होती है. निहित स्वार्थों को स्वेच्छा से कभी नहीं छोड़ा गया है जब तक कि पर्याप्त बल लगाकर मजबूर ना किया गया हो.

  • मैं एक समुदाय की प्रगति का माप महिलाओं द्वारा   हासिल प्रगति की डिग्री द्वारा करता हूँ.

  • मनुष्य नश्वर हैं. ऐसे विचार होते हैं. एक विचार को प्रचार-प्रसार की जरूरत है जैसे एक पौधे में पानी की जरूरत की जरूरत होती है. अन्यथा दोनों मुरझा जायेंगे और मर जायेंगे.

  • हिंदू धर्म में, विवेक, कारण और स्वतंत्र सोच के विकास के लिए कोई गुंजाइश नहीं है.

  • हम सबसे पहले और अंत में, भारतीय हैं.

  • एक महान व्यक्ति एक प्रतिष्ठित व्यक्ति से अलग है क्योंकि वह समाज का सेवक बनने के लिए तैयार रहता है.

  • जीवन  लम्बा  होने  की  बजाय  महान  होना  चाहिए .

  • मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है.

  • पति-पत्नी के बीच का सम्बन्ध घनिष्ट मित्रों जैसा होना चाहिए .

    डॉ भीमराव अम्बेडकर के अनमोल विचार

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