ज्ञानी DITT सिंह 

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ज्ञानी  DITT सिंह को पंजाबी पत्रकारिता  का पितामह कहा जाता है वे महान कवि व प्रसिद्ध लेखक रहे उन्होंने अपनी कलम की ताकत से समाज की कुरीतियों पर प्रहार किया इनका जन्म सन 1850 में गाँव नन्दपुर कलोड जिला फतहगढ़ साहिब पंजाब में हुआ पिता बाबा दीवान व माता रामकौर थी वे रविदासिया जाति से संभंध रखते थे उन्हें अल्पआयु में पड़ने के लिए संत गुरुबक्श के नेतृत्व में गुलबदासी सम्प्रदाय भेजा गया उन्होंने गुरुमुखी वेदत निति शास्त्र आदि ग्रंथो का अध्यन किया बाद में वे भाई जवाहर सिंह के संपर्क में आए और उनसे प्रभवित होकर आर्य समाजी हो गए उन्होंने आर्य समाज के संस्थापक स्वमी दयानन्द से उनका परिचय करवाया हालाँकि वे सिंह सभा आंदोलन में सक्रिय रहे लगातार वे सिंह सभा के प्रचार प्रसार में जुट गए धीरे -धीरे वे आर्य समाज के क्रिया कलापो से दूर होते गए परन्तु आर्य समाज  की 11 ,वी वर्षगांठ पर लाला मुरहधार के द्वारा सिक्ख गुरुओ के लिए आपतिजनक शब्दों का प्रयोग हुआ तो वे बहुत आहत हुए और उन्होंने आर्य समज को छोड़ दिया और सम्पूर्ण जीवन सिंह सभा के कार्यो में लगा दिया उन्होंने तर्क के आधार पर आंडम्बरो व पाखंड का विरोध किया वे मूर्ति पूजा के घोर विरोधी थे उन्होंने अमृतसर श्री दरबार साहिब अमृतसर श्री गुरुग्रंथ साहिब के बराबर बैठने वाले बाबा खेमसिंह बेदी की गद्दी को हटाने की पहल की उन्होंने आर्य समाज के स्वामी दयानन्द को लगातार तीन धार्मिक विचारगोष्ठी में मात दी उन्होंने समाज में फैले अंधविश्वास टूना टोटका झाड़ -फूंक आडमबरो से लोगो को बाहर निकलने व ईश्वर भक्ति के लिए जागृत किया उनका मानना था की जिस समाज में जात-पात रंग नस्ल के आधार पर विभाजन होगा उसका विकास संभव नहीं है उन्होंने अपने छोटे से जीवन में लगभग 70 पुस्तकें लिखी है ज्ञानी ditt सिंह यादगारी अंतराष्ट्रीय समिति उनकी याद में प्रत्येक वर्ष समागम कराती है उन्हें पंथ रत्न सम्मान से सम्मनित किया गया है
सचिन कुमार सेवक
sachinkr4777@gmail.com Sachin Kumar Sewak

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