चीन को खुश करने के चक्कर में फंसी गूगल

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गूगल के कर्मचारियों ने एक बार फिर कम्पनी का विरोध करना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि गूगल उन्हें प्रोजैक्ट ड्रैगनफ्लाई को लेकर पूरी तरह से जानकारी दे और इसके काम करने के तरीके के बारे में बताए।

कर्मचारियों को लग रहा है कि चीन के लिए तैयार हो रहे इस खास सर्च इंजन से लोगों के मानवाधिकारों का उल्लंघन हो सकता है जिससे बहुत ही बड़ी समस्या पैदा हो सकती है।

आपको बता दें कि बस कुछ हफ्ते पहले ही गूगल के कर्मचारियों ने दफ्तर से बाहर निकल कर यौन दुर्व्यवहार के दावे किए थे और कम्पनी को लेकर विरोध जताया था। अब एक बार फिर गूगल विवादों के घेरे में फंस गई हैड्रैगनफ्लाई प्रोजैक्ट के तहत गूगल चीन के लिए एक खास तरह का सर्च इंजन बना रही है।

इस ब्राऊजर में बैंन वैबसाइट्स को आसानी से सर्च रिजल्ट्स से रिमूव किया जा सकता है। यानी चीनी लोगों के लिए इसे खास बनाया गया है ताकि विवादित मुद्दों को रिमूव किया जा सके, लेकिन दुनिया भर के अन्य देशों को गूगल इस तरह के फीचर्स नहीं देती है।

गूगल मुनाफे के लिए लोगों के मानवाधिकारों का व्यापार करना चाहती है और अगर ऐसा नहीं है तो उसे अन्य देशों में भी इस तरह के फीचर देने होंगे। कम्पनी का विरोध करने के बाद लंदन की ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन Amnesty International गूगल कर्मचारियों के साथ आकर खड़ी हो गई है और उनका पूरा समर्थन कर रही है।

गूगल के ड्रैगनफ्लाई प्रोजैक्ट को लेकर पहले ही कई विवादित खबरें सामने आ चुकी हैं व अब तो कम्पनी के विरुद्ध उसके अपने कर्मचारी ही खड़े हो गए हैं। वे गूगल से खुले तौर पर इस प्रोजैक्ट को लेकर स्पष्टीकरण मांग रहे हैं।

ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन ने लोगों से कहा है कि गूगल के कर्मचारियों के साथ एकजुटता में खड़े हो जाओ। वहीं गूगल के CEO सुंदर पिचाई को इस प्रोजैक्ट को लेकर लॉन्च से पहले ही ड्रॉप करने की बात कही गई है और लोगों को DropDragonfly नाम से विरोध जताने को कहा गया है।

एनगैजेट की रिपोर्ट के मुताबिक डाक्यूमैंट्स लीक हुए हैं जिनमें लिखा है कि यह सर्च एप्प अपने आप ऐसी वैबसाइट्स का पता लगा लेगी जिन्हें चीन में ब्लॉक किया गया है और यह चीन के लिए एक बहुत ही बढ़िया फायरवाल फीचर है।

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