कांशीराम जी 

0
517
“काशी राम तेरी नेक कमाई तूने सोती कौम जगाई  “
ऐसे बहुत से स्वर दलित व शोषित वर्ग द्वारा रैलियों सभाओ में कांशीराम के सम्मान व उनके संघर्ष में सुनाई पड़ते थे ये  कांशीराम जी ही थे जिन्होंने दलित वर्ग की पीड़ा को समझा पहचाना और स्वर प्रदान किया कांशीराम का जन्म पंजाब के रोपड़ जिले में सन 1934 में एक रमदासिया सिक्ख परिवार दलित किसान परिवार था कांशीराम दो भाई चार बहनो में सबसे ज्येष्ठ थे उन्होंने अपने गाँव से प्रारंभिक परीक्षा उतीर्ण करने के पश्चात्  बी .एस.सी की पढ़ाई की और फिर पुने में रक्षा उत्पादन विभाग में अनुसंधान सहायक पद की नौकरी की परन्तु इसी विभाग में बुद्ध व डॉ अम्बेडकर जयंती की दो अवकाश को रद्द किए तो कांशीराम ने इसके विरोध में आवाज उठाई और सफलता भी हासिल की इस घटना ने उनके जीवन के लक्ष्य को बदल दिया और नौकरी से त्यागपत्र देकर सामपूर्ण जीवन दलित -शोषित समाज को समप्रित कर दिया वे डॉ.बी .आर .अम्बेडकर के संघर्ष से बहुत प्रभावित थे वे डॉ अम्बेडकर की इस बात में विश्वास रखते थे की सता वह चाभी है जिससे सभी ताले खुलते है इसी उद्देश्य की प्राप्ति हेतु उन्होंने बामसेफ की स्थापना सन 1978 में की इस संस्था के माध्यम से उन्होंने सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियो को सगठित करने का प्रयास किया और इस चेतना को जागृत किया की जो आपने समाज से प्राप्त किया उसे दलित समाज के उत्थान के संघर्ष में सम्मलित होकर वापिस करो कुछ ही समय में बामसेफ मजबूत संगठन के रूप में उभर कर सामने आ गया  कांशीराम ने सन 1981 में डी. एस .फोर की स्थापना के माध्यम से संगठन का विस्तार किया यह संस्था डॉ .अम्बेडकर के विचारो को दलित -शोषित समाज पर हो रहे अत्याचारों को घूम -घूम प्रचार -प्रसार करती थे लगातार संघर्ष के क्रम में कांशीराम ने दलित समाज के उत्थान के उद्देश्य की पूर्ति हेतु 14 अप्रैल 1984 को बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की वे इस बात के प्रबल समर्थक थे जब तक हम सता में नहीं आएँगे जब तक समस्याओ रूपी ताले नहीं खुलेंगे काशीराम जी के लगातार संघर्ष व अथक प्रयासों के फलस्वरूप मायावती उतर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी वे आजीवन अविवाहित रहे और दलित समाज को ही अपना घर परिवार मानकर उनके उत्थान में संघर्षरत रहे
सचिन कुमार सेवक
sachinkr4777@gmail.comSachin Kumar Sewak

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here