एडहॉक शिक्षिकाओं को मातृत्व अवकाश देने का फैसला

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दिल्ली विश्व विद्यालय की रेगुलेशन अमेंडमेंट कमेटी की अंतिम बैठक में दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हो दोनों ही निर्णय एडहॉक शिक्षकों की सेवा शर्तो से सम्बंधित है इसमें एडहॉक शिक्षिकाओं को मातृत्व अवकाश देने का फैसला ऐतिहासिक रहा

डीयू और उससे सम्बन्ध कॉलेजों में 4500 से अधिक एडहॉक शिक्षक पढ़ाते है जिनमे आधे से अधिक महिलाए है

उच्च स्तरीय कमेटी सदस्य डॉ गीता भट्ट ने बताया है की महिला एडहॉक शिक्षिकाओं को मातृत्व अवकाश नहीं मिलना एक बड़ी समस्या रही है इस सुविधा के नहीं होने के कारण हमारी महिला साथियो को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता था

उन्हें उत्पीड़न भी किया जाता था और कई बार उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया जाता था जबकि मातृत्व किसी भी महिला का प्राकृतिक अधिकार और गौरव है

उसके लिए उसे प्रताड़ना या दंड सहना पड़े यह दुःख और चिंता का विषय है इसलिए हमने श्रम मंत्रालय के नियमो और यूजीसी के परिपत्र का हवाला देकर अपनी महिला साथियो को मातृत्व अवकाश दिलाने की पहल की है

इन मुद्दों में प्रोफेसर पद के प्रमोशन हेतु दस अनिवार्य रिसर्च पेपरों में दो स्वलिखित पुस्तकों को भी शामिल करने की छूट प्रदान की गई है. साथ ही एसोसिएट प्रोफेसर बनने के बाद की 3 वर्ष की मूल्यांकन अवधि में अनिवार्य 3 रिसर्च पेपरों में एक स्वलिखित पुस्तक जोड़ने की रियायत भी दी गई है.

कमेटी के सदस्य डॉ. रसाल सिंह ने बताया है कि एमपीएस 98 और केस 2010 की अवधि के बकाया प्रमोशन वाले शिक्षकों को भी एडहॉक सर्विस जोड़ने का लाभ मिलेगा. इसमें पीडीएफ एक्सपीरियंस शामिल करने पर भी सहमति बनी है. इससे नए और पुराने प्रमोशनों की उलझी गुत्थी सुलझ सकेगी.

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